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2021 मधील गुरु पुष्य योगं

2021 गुरु पुष्य नक्षत्र, तारीख New Delhi, India साठी

तारीख सुरवातीचा काळ शेवटचा काळ
गुरुवार, 28 जानेवारी 07:11:37 27:50:37
गुरुवार, 25 फेब्रुवारी 06:50:55 13:17:57
गुरुवार, 30 सप्टेंबर 25:33:31 30:13:44
गुरुवार, 28 ऑक्टोबर 09:41:35 30:30:35
गुरुवार, 25 नोव्हेंबर 06:51:16 18:49:34

जिस प्रकार शेर समस्त जानवरों का राजा होता है, ठीक उसी प्रकार गुरु पुष्य योग भी सभी योगों में प्रधान माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस शुभ योग में किए गए कार्य सफल होते हैं। इसलिए लोग गुरु पुष्य योग में अपने नए कार्य का श्रीगणेश करना शुभ मानते हैं। वे इस अवसर पर अपना नए व्यापार का आरंभ, नई प्रॉपर्टी अथवा नया वाहन आदि ख़रीदते हैं।

वैसे तो चंद्रमा का राशि के चौथे, आठवें एवं 12वें भाव में उपस्थित होना अशुभ माना जाता है। परंतु यह पुष्य नक्षत्र की ही अनुकंपा है जो अशुभ घड़ी को भी शुभ घड़ी में परिवर्तित कर देती है। इसी कारण 27 नक्षत्रों में इसे शुभ नक्षत्र माना गया है।

शास्त्रों के अनुसार यह माना गया है कि इसी नक्षत्र में धन व वैभव की देवी लक्ष्मी जी का जन्म हुआ था। जब पुष्य नक्षत्र गुरुवार एवं रविवार के दिन पड़ता है तो क्रमशः इसे गुरु पुष्यामृत योग और रवि पुष्यामृत योग कहते हैं। ये दोनों योग धनतेरस, चैत्र प्रतिपदा के समान ही शुभ हैं।

ग्रहों की विपरीत दशा से बावजूद भी यह योग बेहद शक्तिशाली है। इसके प्रभाव में आकर सभी बुरे प्रभाव दूर हो जाते हैं, परंतु ऐसा कहते हैं कि इस योग में विवाह जैसा शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। शास्त्रो में उल्लेखित है कि एक श्राप के अनुसार इस दिन किया हुआ विवाह कभी भी सुखकारक नहीं हो सकता |

एस्ट्रोसेज की ओर से हम आशा करते हैं कि इस लेख माध्यम से आप गुरु पुष्यामृत योग के विषय से संबंधित जानकारी से संतुष्ट होंगे। हमारी वेबसाइट से जुड़े रहने के लिए आपका हृदय से धन्यवाद।

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