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2233 जेष्ठ पौर्णिमा व्रत

2233 मध्ये जेष्ठ पौर्णिमा कधी आहे?

22

जून, 2233

(शनिवार)

ज्येष्ठ पौर्णिमा व्रत

जेष्ठ पौर्णिमा व्रत मुहूर्त New Delhi, India

पौर्णिमा तिथी सुरवात 06:39:25 पासुन. जून 22, 2233 रोजी
पौर्णिमा तिथी समाप्ती 03:36:26 पर्यंत. जून 23, 2233 रोजी

ज्येष्ठ माह में आने वाली पूर्णिमा का हिन्दू धर्म में बड़ा महत्व है। धार्मिक दृष्टिकोण से पूर्णिमा के दिन स्नान और दान-धर्म करने का विधान है। इस दिन गंगा में स्नान करने से व्यक्ति की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। ज्येष्ठ पूर्णिमा को वट पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है, जो कि वट सावित्री व्रत के समान ही होता है। गुजरात, महाराष्ट्र व दक्षिण के राज्यों में विशेष रूप से महिलाएं ज्येष्ठ पूर्णिमा को वट सावित्री का व्रत रखती हैं। हालांकि उत्तर भारत में यह व्रत ज्येष्ठ अमावस्या को किया जाता है।

ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत और पूजा विधि

ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन स्नान, ध्यान और पुण्य कर्म करने का विशेष महत्व है। चूंकि ज्येष्ठ पूर्णिमा को वट पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है इसलिये इसकी पूजा विधि इस प्रकार है-

●  इस दिन सुहागिन स्त्रियों को वट वृक्ष की पूजा करनी चाहिए और कथा सुननी चाहिए।
●  बांस की दो टोकरी लें, इनमें से एक टोकरी में सात प्रकार के अनाज को कपड़े से ढंक कर रखें।
●  दूसरी टोकरी में माँ सावित्री की प्रतिमा रखें और साथ में धूप, दीप, अक्षत, कुमकुम, मौली आदि पूजा सामग्री भी रखनी चाहिए।
●  माँ सावित्री की पूजा कर वट वृक्ष के सात चक्कर लगाते हुए मौली का धागा वट वृक्ष पर बांधें।
●  इसके बाद किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को श्रद्धानुसार दान-दक्षिणा दें और प्रसाद के रूप में चने व गुड़ का वितरण करें।


ज्येष्ठ पूर्णिमा का महत्व

हिन्दू धर्म में ज्येष्ठ पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस दिन से श्रद्धालु गंगा जल लेकर अमरनाथ यात्रा के लिये निकलते हैं। हिन्दू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह हिन्दू वर्ष का तीसरा महीना होता है। इस समय में धरती पर प्रचंड गर्मी रहती है और कई नदी व तालाब सूखे जाते हैं या उनका जल स्तर कम हो जाता है। इसलिए इस महीने में जल का महत्व अन्य महीनों की तुलना में बढ़ जाता है। ज्येष्ठ माह में आने वाले कुछ पर्व जैसे- गंगा दशहरा, निर्जला एकादशी के माध्यम से हमें ऋषि-मुनियों ने संदेश दिया है कि जल के महत्व को पहचानें और इसका सदुपयोग करें।

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