Coronavirus: stay at home Leave your home if it's necessary. It will help stop the spread of novel coronavirus & COVID-19

  1. भाषा :

2020 पापमोचनी एकादशी व्रत

2020 मध्ये पापमोचनी एकादशी कधी आहे?

19

मार्च, 2020

(गुरुवार)

पापमोचनी एकादशी व्रत मुहूर्त्त New Delhi, India

पापमोचनी एकादशी उपवास सोडण्याची वेळ :
13:41:30 ते 16:07:07 मार्च, 20
कालावधी :
2 तास 25 मिनिटे
हरी वासरा समाप्ती क्षण :
12:30:14 ला मार्च, 20

पापमोचनी एकादशी का अर्थ है पाप को नष्ट करने वाली एकादशी। इस दिन विधि विधान से भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। पापमोचनी एकादशी के दिन किसी की निंदा और झूठ बोलने से बचना चाहिए। इस व्रत को करने से ब्रह्महत्या, स्वर्ण चोरी, मदिरापान, अहिंसा और भ्रूणघात समेत अनेक घोर पापों के दोष से मुक्ति मिलती है।

पापमोचनी एकादशी व्रत पूजा विधि

समस्त पापों को नष्ट करने वाली पापमोचनी एकादशी व्रत की पूजा विधि इस प्रकार है:

1.  एकादशी के दिन सूर्योदय काल में स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प करें।
2.  इसके बाद भगवान विष्णु की षोडशोपचार विधि से पूजा करें और पूजन के उपरांत भगवान को धूप, दीप, चंदन और फल आदि अर्पित करके आरती करनी चाहिए।
3.  इस दिन भिक्षुक, जरुरतमंद व्यक्ति व ब्राह्मणों को दान और भोजन अवश्य कराना चाहिए।
4.  पापमोचनी एकादशी पर रात्रि में निराहार रहकर जागरण करना चाहिए और अगले दिन द्वादशी पर पारण के बाद व्रत खोलना चाहिए।

मान्यता है कि इस व्रत को करने से पापों का नाश होता है और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। एकादशी तिथि को जागरण करने से कई गुना पुण्य भी मिलता है।

पौराणिक कथा

धार्मिक मान्यता के अनुसार पुरातन काल में चैत्ररथ नामक एक बहुत सुंदर वन था। इस जंगल में च्यवन ऋषि के पुत्र मेधावी ऋषि तपस्या करते थे। इसी वन में देवराज इंद्र गंधर्व कन्याओं, अप्सराओं और देवताओं के साथ विचरण करते थे। मेधावी ऋषि शिव भक्त और अप्सराएं शिवद्रोही कामदेव की अनुचरी थीं। एक समय कामदेव ने मेधावी ऋषि की तपस्या भंग करने के लिए मंजू घोषा नामक अप्सरा को भेजा। उसने अपने नृत्य, गान और सौंदर्य से मेधावी मुनि का ध्यान भंग कर दिया। वहीं मुनि मेधावी भी मंजूघोषा पर मोहित हो गए। इसके बाद दोनों ने अनेक वर्ष साथ में व्यतीत किये। एक दिन जब मंजूघोषा ने जाने के लिए अनुमति मांगी तो मेधावी ऋषि को अपनी भूल और तपस्या भंग होने का आत्मज्ञान हुआ। इसके बाद क्रोधित होकर उन्होंने मंजूघोषा को पिशाचनी होने का श्राप दिया। इसके बाद अप्सरा ने ऋषि के पैरों में गिर पड़ी और श्राप से मुक्ति का उपाय पूछा। मंजूघोषा के अनेकों बार विनती करने पर मेधावी ऋषि ने उसे पापमोचनी एकादशी का व्रत करने का उपाय बताया और कहा इस व्रत को करने से तुम्हारे पापों का नाश हो जाएगा व तुम पुन: अपने पूर्व रूप को प्राप्त करोगी। अप्सरा को मुक्ति का मार्ग बताकर मेधावी ऋषि अपने पिता के महर्षि च्यवन के पास पहुंचे। श्राप की बात सुनकर च्यवन ऋषि ने कहा कि- ‘’पुत्र यह तुमने अच्छा नहीं किया, ऐसा कर तुमने भी पाप कमाया है, इसलिए तुम भी पापमोचनी एकादशी का व्रत करो।‘’

इस प्रकार पापमोचनी एकादशी का व्रत करके अप्सरा मंजूघोषा ने श्राप से और मेधावी ऋषि ने पाप से मुक्ति पाई।

अॅस्ट्रोसेज मोबाइल वरती सर्व मोबाईल ऍप

अॅस्ट्रोसेज टीव्ही सदस्यता घ्या

रत्न विकत घ्या

AstroSage.com वर आश्वासनासह सर्वोत्कृष्ट रत्न

यंत्र विकत घ्या

AstroSage.com वर आश्वासनासह यंत्राचा लाभ घ्या

नऊ ग्रह विकत घ्या

ग्रहांना शांत करण्यासाठी आणि आनंदी आयुष्य मिळवण्यासाठी यंत्र AstroSage.com वर मिळावा

रुद्राक्ष विकत घ्या

AstroSage.com वर आश्वासनासह सर्वोत्कृष्ट रुद्राक्ष