Coronavirus: stay at home Leave your home if it's necessary. It will help stop the spread of novel coronavirus & COVID-19

  1. भाषा :

चेटी चंद 2021 दिनांक व मुहूर्त

2021 मध्ये चैती चंद्र कधी आहे?

14

एप्रिल, 2021

(बुधवार)

चैती चंद्र मुहूर्त New Delhi, India

द्वितीया तिथी सुरवात 10:18:32 पासुन. एप्रिल 13, 2021 रोजी
द्वितीया तिथी समाप्ती 12:49:33 पर्यंत. एप्रिल 14, 2021 रोजी

चला जाणून घेऊया 2021 मध्ये चेटी चंद केव्हा आहे व चेटी चंद 2021 चे दिनांक व मुहूर्त.

चेटी चंड सिंधी समुदाय द्वारा मनाया जाने वाला एक प्रमुख त्यौहार है। यह पर्व सिंधी समाज के आराध्य देवता भगवान झूले लाल के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है इसलिए इसे झूलेलाल जयंती के नाम से भी जाना जाता है। इस त्यौहार के साथ ही सिंधी नव वर्ष की शुरुआत होती है। चेटी चंड पर्व चैत्र माह में शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाता है। इस मौके पर सिंधी समाज के लोग जीवन में सुख-समृद्धि की कामना के लिए वरुण देवता की पूजा करते हैं। क्योंकि भगवान झूले लाल को जल देवता का अवतार माना जाता है। चेटी चंड पर्व अब धार्मिक महत्व तक ही सीमित नहीं है बल्कि सिंधु सभ्यता के प्रतीक के तौर पर भी जाना जाने लगा है।

चेटी चंड पूजा विधि

चेटी चंड के अवसर पर सिंधी समुदाय द्वारा भगवान झूले लाल की शोभा यात्रा निकाली जाती है। इसके अलावा इस दिन कई धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

1.  चेटी चंड की शुरुआत सुबह टिकाणे (मंदिरों) के दर्शन और बुज़ुर्गों के आशीर्वाद से होती है।
2.  चेटी चंड के दिन सिंधी समाज के लोग नदी और झील के किनारे पर बहिराणा साहिब की परंपरा को पूरा करते हैं। बहिराणा साहिब, इसमें आटे की लोई पर दीपक, मिश्री, सिंदूर, लौंग, इलायची, फल रखकर पूजा करते हैं और उसे नदी में प्रवाहित किया जाता है। इस परंपरा का उद्देश्य है, मन की इच्छा पूरी होने पर ईश्वर के प्रति आभार प्रकट करना और जलीय जीवों के भोजन की व्यवस्था करना।
3.  इस मौके पर भगवान झूले लाल की मूर्ति पूजा की जाती है। पूजन के दौरान सभी लोग एक स्वर में जय घोष करते हुए कहते हैं ‘’चेटी चंड जूं लख-लख वाधायूं’’ ।
4.  चेटी चंड के मौके पर जल यानि वरुण देवता की भी पूजा की जाती है। क्योंकि भगवान झूले लाल को जल देवता के अवतार के तौर पर भी पूजा जाता है। इस दिन सिंधु नदी के तट पर ‘’चालीहो साहब’’ नामक पूजा-अर्चना की जाती है। सिंधी समुदाय के लोग जल देवता से प्रार्थना करते हैं कि वे बुरी शक्तियों से उनकी रक्षा करें।
5.  चेटी चंड के मौके पर सिंधी समाज में नवजात शिशुओं का मंदिरों में मुंडन भी कराया जाता है।

चेटी चंड से जुड़ी पौराणिक कथा

चेटी चंड पर्व सिंधी नववर्ष का शुभारंभ दिवस है। इसी दिन विक्रम संवत 1007 सन 951 ईस्वी में सिंध प्रांत के नरसपुर नगर में भगवान झूले लाल का जन्म रतन लाल लुहाना के घर माता देवकी के गर्भ से हुआ था। भगवान झूले लाल को लाल साईं, उडेरो लाल, वरुण देव और ज़िंदा पीर के नाम से भी जाना जाता है। भगवान झूले लाल ने धर्म की रक्षा के लिए कई साहसिक कार्य किये। भगवान झूलेलाल ने हिंदू-मुस्लिम की एकता के बारे में अपने विचार रखे और एक ईश्वर के सिद्धांत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ‘’ईश्वर एक है और हम सब को मिलकर शांति के साथ रहना चाहिए’’। इस वजह से भगवान झूले लाल की वंदना हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय करते हैं।

आप सभी को चेटी चंड पर्व की ढेर सारी बधाईयां। हम आशा करते हैं भगवान झूले लाल की कृपा आप पर बनी रहे और आपके जीवन में सुख-समृद्धि व खुशहाली आए।

अॅस्ट्रोसेज मोबाइल वरती सर्व मोबाईल ऍप

अॅस्ट्रोसेज टीव्ही सदस्यता घ्या

रत्न विकत घ्या

AstroSage.com वर आश्वासनासह सर्वोत्कृष्ट रत्न

यंत्र विकत घ्या

AstroSage.com वर आश्वासनासह यंत्राचा लाभ घ्या

नऊ ग्रह विकत घ्या

ग्रहांना शांत करण्यासाठी आणि आनंदी आयुष्य मिळवण्यासाठी यंत्र AstroSage.com वर मिळावा

रुद्राक्ष विकत घ्या

AstroSage.com वर आश्वासनासह सर्वोत्कृष्ट रुद्राक्ष