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आज का पंचांग - दैनिक पंचांग

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मंगलवार, अक्टूबर 23, 2018 का पंचांग New Delhi, India के लिए

आज का पंचांग आपको स्थान के आधार पर प्रत्येक ज़रूरी मुहूर्त, सूर्योदय व सूर्यास्त, चन्द्रोदय व चन्द्रास्त आदि बहुत-सी सूचनाएँ उपलब्ध कराता है। यदि आप किसी शुभ कार्य को किसी विशेष दिन में करना चाहते हैं तो दैनिक पंचांग की सहायता से आप उस दिन का शुभ मुहूर्त ज्ञात कर सकते हैं। आज का पंचांग अथवा उस विशेष दिन का पंचांग जानने के लिए आप यहाँ आज की तारीख़ और अपने शहर का नाम दर्ज कर सकते हैं -

आज का पंचांग

पक्ष
शुक्ल
मंगलवार

सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ

सूर्योदय
06:26:36
सूर्यास्त
17:44:11
चन्द्र राशि
मीन
चन्द्रोदय
17:15:00
चन्द्रास्त
ऋतु
शरद

हिन्दू मास एवं वर्ष

शक सम्वत
1940   विलम्बी
विक्रम सम्वत
2075
काली सम्वत
5120
दिन काल
11:17:35
मास अमांत
आश्विन
मास पूर्णिमांत
आश्विन

अशुभ समय (अशुभ मुहूर्त)

दुष्टमुहूर्त
08:42:07 से 09:27:17 तक
कुलिक
13:13:09 से 13:58:19 तक
कंटक
07:11:46 से 07:56:56 तक
राहु काल
14:54:48 से 16:19:29 तक
कालवेला / अर्द्धयाम
08:42:07 से 09:27:17 तक
यमघण्ट
10:12:27 से 10:57:38 तक
यमगण्ड
09:15:59 से 10:40:41 तक
गुलिक काल
12:05:23 से 13:30:06 तक

शुभ समय (शुभ मुहूर्त)

11:42:48 से 12:27:59 तक

दिशा शूल

दिशा शूल
उत्तर

चन्द्रबल और ताराबल

ताराबल
अश्विनी, कृत्तिका, मृगशीर्षा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, उत्तराषाढा, धनिष्ठा, पूर्वभाद्रपदा, उत्तरभाद्रपदा, रेवती
चन्द्रबल
वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर, मीन

आज का पंचांग क्या है?

पंचांग या पञ्चाङ्गम् संस्कृत भाषा का शब्द है, जिसका शब्दशः मतलब है पांच अंगों से युक्त वस्तु। इसलिए, पंचांग इन 5 अनिवार्य अंगों से मिलकर बनता है - तिथि, वार, योग, नक्षत्र और करण। इसके अलावा हिन्दू कैलेंडर के माध्यम से लोगों को पक्ष, ऋतु एवं माह का भी पता चलता है। हिन्दी पंचांग के अनुसार एक वर्ष में 12 माह होते हैं और एक माह में दो पक्ष (शुक्ल और कृष्ण पक्ष) होते हैं। जबकि एक पक्ष में 15 तिथियाँ होती हैं। वहीं वैदिक पंचांग में माह और ऋतुओं के नाम अंग्रेज़ी कैलेंडर से भिन्न होते हैं।

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार माह के नाम

1. चैत्र, 2. वैशाख, 3. ज्येष्ठ, 4. आषाढ़,
5. श्रावण (सावन), 6. भाद्रपद, 7. अश्विन, 8. कार्तिक,
9. मार्गशीर्ष, 10. पौष, 11. माघ, 12. फाल्गुन

हिन्दू पंचांग में ऋतु

आज का पंचांग, नामक इस पेज़ में आप भारतीय ऋतुओं के सबंध में जान सकते हैं। भारत वर्ष एक ऐसा देश हैं जहाँ पर आपको सभी प्रकार की ऋतुएँ मिलती हैं। ऐसा यहाँ की भौगोलिक विविधताओं के कारण संभव हो पाता है। हिन्दू कैलेंडर (हिन्दू पंचांग) के अनुसार भारत में छः ऋतुएँ होती हैं, जिनके नाम क्रमशः इस प्रकार हैं -

1.  वसंत ऋतु
2.  ग्रीष्म ऋतु
3.  वर्षा ऋतु
4.  शरद ऋतु
5.  हेमंत ऋतु
6.  शिशिर ऋतु

तिथि - तिथि को बोलचाल की भाषा में तारीख़ या फिर दिनांक कहते हैं। लेकिन तकनीकी रूप से यह डेट से भिन्न है। क्योंकि हिन्दू पंचांग में एक तिथि 19 से लेकर 24 घंटे तक हो सकती है। लेकिन अंग्रेज़ी तारीखें 24 घंटे के बाद परिवर्तित हो जाती है। कई बार एक दिन में दो तिथियाँ भी होती हैं। परंतु इसमें सूर्योदय की तिथि को मुख्य तिथि माना जाता है। तिथियों के नाम - प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीय, चतुर्थी, पंचमी, षष्टी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्थदशी। शुक्ल पक्ष में पंचदशी तिथि को पूर्णिमा कहते हैं जबकि कृष्ण पक्ष में पंद्रवी तिथि को अमावस्या के नाम से जाना जाता है।

वार - वैदिक ज्योतिष के अनुसार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के समयावधि को एक वार कहा जाता है। बोलचाल की भाषा में वार को दिन भी कहते हैं। एक सप्ताह में सात वार होते हैं। सोमवार, मंगलवार, बुधवार, बृहस्पतिवार, शुक्रवार, शनिवार, रविवार।

योग - हिन्दू ज्योतिष के अनुसार सूर्य एवं चंद्रमा के संयोग से योग का निर्माण होता है। तकनीकी भाषा में यदि इसे समझा जाए तो सूर्य और चंद्रमा के भोगांश को जोड़कर 13 अंश 20 मिनट से भाग देने पर एक योग की अवधि प्राप्त होती है। योग का शाब्दिक अर्थ ही दो चीज़ों को जोड़ना होता है। योग 27 प्रकार के होते हैं। 1. विष्कुम्भ, 2. प्रीति, 3. आयुष्मान, 4. सौभाग्य, 5. शोभन, 6. अतिगण्ड, 7. सुकर्मा, 8. धृति, 9. शूल, 10. गण्ड, 11. वृद्धि, 12. ध्रुव, 13. व्याघात, 14. हर्षण, 15. वज्र, 16. सिद्धि, 17. व्यातीपात, 18. वरीयान, 19. परिघ, 20. शिव, 21. सिद्ध, 22. साध्य, 23. शुभ, 24. शुक्ल, 25. ब्रह्म, 26. इन्द्र, 27. वैधृति।

नक्षत्र - आसमान में तारों के समूह को नक्षत्र कहते हैं। वैदिक ज्योतिष में नक्षत्र को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। वैदिक ज्योतिष में 27 नक्षत्र होते हैं। 27 नक्षत्रों के नाम इस प्रकार हैं- 1. अश्विनी, 2. भरणी, 3. कृतिका, 4. रोहिणी, 4. मृगशिरा, 6. आर्द्रा, 7. पुनर्वसु, 8. पुष्य, 9. अश्लेषा, 10. मघा, 11. पूर्वा फाल्गुनी, 12. उत्तरा फाल्गुनी, 13. हस्त, 14. चित्रा, 15. स्वाती, 16. विशाखा, 17. अनुराधा, 18. ज्येष्ठा, 19. मूल, 20. पूर्वाषाढ़ा, 21. उत्तराषाढा, 22. श्रवण, 23. धनिष्ठा, 24. शतभिषा, 25. पूर्वाभाद्रपद, 26. उत्तरभाद्रपद, 27. रेवती।

करण - तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं अर्थात एक माह में कुल 60 करण होते हैं। करण को दो भागों में विभाजित किया गया है - चर और स्थिर करण।
चर करण के नाम इस प्रकार हैं - बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज्य, विष्टी।
स्थिर करण के नाम इस प्रकार है - शकुनि, चतुष्पाद, नाग, किंस्तुघ्न।

हिन्दू कैलेंडर का इतिहास

हिन्दू पंचांग में विक्रम संवत का महत्वपूर्ण स्थान है। गणना हेतु इसे सबसे सटीक कैलेंडर माना जाता है। 75 ईसा पूर्व महान राजा विक्रमादित्य के काल में इस कैलेंडर की शुरुआत हुई थी। इसलिए इसे विक्रम संवत कहते हैं। इस संवत के अनुसार ही 12 महीने का एक वर्ष और सात दिन का एक सप्ताह रखने का प्रचलन शुरु हुआ था। परंतु आज़ाद भारत में ग्रेगोरियन कैलेंडर को राजकीय कैलेंडर की मान्यता मिली हुई है। भारत के पड़ोसी देश नेपाल में विक्रम संवत को राष्ट्रीय कैलेण्डर घोषित किया गया है।

दैनिक पंचाग की उपयोगिता

आधुनिक हिन्दू पंचांग में पर्व, राशिफल, आवश्यक तिथियाँ और कई अन्य महत्वपूर्ण जानकारियाँ भी शामिल होती हैं। यहाँ, “आज का पंचांग” आपको आपकी जगह के आधार पर प्रत्येक ज़रूरी मुहूर्त, दिशा शूल, सूर्योदय व सूर्यास्त, चन्द्रोदय व चन्द्रास्त, ताराबल तथा चंद्र बल आदि बहुत-सी सूचनाएँ उपलब्ध कराएगा। इस सूचना के आधार पर आप अपने कार्य का प्रारंभ अथवा कार्य योजना बना सकते हैं। इसलिए कहा जाता है कि सही समय में किया गया कार्य, हमेशा शुभ फलदायी होता है। इस लेख के माध्यम से हम आशा करते हैं कि आज के पंचांग सें सबंधित दी गई उपरोक्त जानकारियाँ आपके लिए उपयोगी सिद्ध होंगी।

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