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अगस्त 2026 पंचक दिनांक और समय

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अगस्त 2026 पंचक दिनांक और समय New Delhi, India के लिए

पंचकआरंभ काल पंचकसमाप्ति काल
शुक्रवार, 31 जुलाई 06:38:50 बजे मंगलवार, 4 अगस्त 21:54:55 बजे
गुरुवार, 27 अगस्त 13:36:21 बजे मंगलवार, 1 सितंबर 03:24:42 बजे

वैदिक ज्योतिष के अंतर्गत किसी भी शुभ कार्य का मुहूर्त जानने के लिए हमें पंचांग की आवश्यकता होती है। पंचांग के द्वारा ही विभिन्न प्रकार के वार, तिथि, नक्षत्र, करण तथा योग की जानकारी प्राप्त होती है। इसी पंचांग के अंतर्गत मुहूर्त का ध्यान करते समय हमें पंचक का विशेष ध्यान रखना होता है क्योंकि पंचक लगने का समय मुहूर्त शास्त्र में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए हमने पंचक कैलकुलेटर आपके सामने प्रस्तुत किया है। इस कैलकुलेटर के माध्यम से आप जान सकते हैं कि किस दिन पंचक प्रारंभ होंगे और किस दिन समाप्त होंगे। इसकी सहायता से आप पंचक के समय के बारे में भी पूरी जानकारी प्राप्त कर अपना कीमती समय बचा सकते हैं।

पंचक क्या है?

वैदिक ज्योतिष के अनुसार 5 ऐसे नक्षत्र हैं जिनके विशेष संयोग से बनने वाले योग को पंचक कहा जाता है। यह पांच नक्षत्र शुभ कार्यों के लिए दूषित माने जाते हैं इसी कारण कुछ विशेष कार्यों को पूर्ण करने से पहले पंचक का विशेष ध्यान रखा जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार नक्षत्र चक्र में 27 नक्षत्रों का वर्णन किया गया है। इन नक्षत्रों के आधार पर ही सभी 12 राशियों में सभी 27 नक्षत्रों को विभक्त किया गया है। जिसके अनुसार एक राशि में लगभग सवा दो नक्षत्र आते हैं। एक नक्षत्र का मान 13 अंश 20 मिनट होता है और प्रत्येक नक्षत्र के चार चरण होते हैं जिसमें प्रत्येक चरण 3 अंश 20 मिनट का होता है। एक राशि का मान 30 अंश का होता है। जब चंद्रमा अपनी गति करते हुए कुंभ और मीन राशि में गोचर करते हैं तो उसी समय पंचक लगते हैं।

कौन से हैं पंचक नक्षत्र?

जैसे ही चंद्र देव कुंभ राशि में प्रवेश करते हैं धनिष्ठा नक्षत्र के तीसरे चरण का प्रारंभ होता है। उसके बाद शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती से होकर चंद्र देव आगे बढ़ जाते हैं। इस प्रकार इन पांचों नक्षत्र में गति करते हुए चंद्र देव को लगभग 5 दिन का समय लगता है यही 5 दिन और यही पांच नक्षत्र पंचक कहलाते हैं। चूँकि 27 दिन में चंद्र देव सभी राशियों में भ्रमण करते हुए दोबारा उसी राशि में प्रवेश कर जाते हैं। इसलिए 27 दिन की आवृत्ति के बाद पुनः पंचक लगते हैं।

पंचक का महत्व

हिंदू संस्कृति में सभी कार्यों को मुहूर्त देखकर करने का विधान है। शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य आसानी से तथा सफलता दायक होते हैं तथा मुहूर्त के बिना किए गए कार्यों में सफलता मिलने में संदेह होता है। इसी मुहूर्त का ध्यान रखते हुए कुछ विशेष कार्यों के निमित्त पंचक को विशेष महत्व दिया गया है।

पंचक के अनुसार कार्य की आवृत्ति

पंचक में पांच नक्षत्र का योग होता है इसलिए माना जाता है कि पंचक के समय में यदि कोई अशुभ कार्य हो जाए तो वह 5 बार पुनः होता है। अर्थात उसके बाद पांच बार उसकी पुनरावृत्ति होती है। इसलिए पंचक के दौरान हुए अशुभ कार्य का निवारण करना अति आवश्यक हो जाता है। विशेष रुप से यदि पंचक के दौरान किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो घर परिवार में पांच लोगों पर मृत्यु के समान संकट मंडराता रहता है। इसलिए उसकी मृत्यु के उपरांत दाह संस्कार के समय आटे और चावल के 5 पुतले बनाकर मृतक के साथ में उनका भी दाह संस्कार कर दिया जाता है ताकि परिवार के अन्य सदस्यों पर से पंचक के संकट की समाप्ति हो जाए और उन्हें किसी प्रकार का कोई कष्ट न उठाना पड़े।

पंचक के प्रकार

प्रत्येक दिन के हिसाब से पंचकों का वर्गीकरण किया गया है, अर्थात किसी खास दिन शुरू होने वाले पंचक एक अलग नाम से जाने जाते हैं और उनका अलग-अलग प्रभाव भी होता है।आइए जानते हैं विभिन्न प्रकार के पंचक के बारे में:

1.  रोग पंचक

जब पंचक का प्रारंभ रविवार के दिन होता है तो ऐसे पंचक को रोग पंचक कहते हैं। रोग पंचक के कारण आने वाले 5 दिन विशेष रुप से सर्व कष्ट और मानसिक परेशानियों को देने वाले होते हैं। इस पंचक में शुभ कार्यों को सर्वथा त्यागना चाहिए क्योंकि यह हर तरह के शुभ कार्यों में अशुभ माने जाते हैं।

2.  राज पंचक

जब पंचक सोमवार के दिन से शुरू होते हैं तो ऐसे पंचक को राज पंचक कहा जाता है। आमतौर पर यह पंचक शुभ माने जाते हैं और उनके प्रभाव से आने वाले सभी 5 दिन कार्य में सफलता और सरकारी कामकाज से लाभ दिलाते हैं तथा संपत्ति से जुड़े काम करने के लिए भी राज पंचक काफी उपयुक्त होता है।

3.  अग्नि पंचक

मंगलवार के दिन से शुरू होने वाले पंचक अग्नि पंचक के नाम से जाने जाते हैं। इस दौरान आप कोर्ट कचहरी और विवाद आदि के फ़ैसलों पर अपना हक प्राप्त करने के लिए अनेक कार्य कर सकते हैं। यह पंचक अशुभ माना जाता है इसी वजह से इस पंचक में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य तथा मशीनरी और औजार के काम की शुरुआत करना अशुभ होता है। क्योंकि ये देखा जाता है कि इस पंचक पर इन कार्यों को करने से नुकसान होने की पूरी संभावना रहती है।

4.  चोर पंचक

शुक्रवार के दिन से शुरू होने वाले पंचक चोर पंचक कहलाते हैं। चोर पंचक विशेष रूप से यात्रा करने के उद्देश्य से त्याज्य माने जाते हैं। इसके अलावा इस पंचक पर किसी भी प्रकार का व्यापार, लेन-देन तथा किसी भी प्रकार का सौदा नहीं करना चाहिए। यदि आप ऐसे कार्य करते हैं तो आपको विशेष रूप से धन की हानि हो सकती है।

5.  मृत्यु पंचक

इसी क्रम में जब पंचक की शुरुआत शनिवार के दिन से होती है तो ऐसा पंचक मृत्यु पंचक कहलाता है। इस पंचक के दौरान मृत्यु तुल्य कष्टों की प्राप्ति हो सकती है और यह पूरी तरह से अशुभ माना जाता है। इस दौरान आपको किसी भी प्रकार के कष्टकारी कार्य और किसी भी प्रकार के जोखिम भरे कामों को करने से बचना चाहिए, क्योंकि इस पंचक के प्रभाव से आपको किसी प्रकार की चोट लग सकती है अथवा आपके साथ कोई दुर्घटना भी हो सकती है। साथ ही अपने लोगों तथा अन्य लोगों से भी विवाद की स्थिति बन सकती है।

विशेष नोट: इसके अतिरिक्त जब कोई पंचक बुधवार या बृहस्पतिवार को शुरू होता है तो उनमें उपरोक्त किसी भी प्रकार की बात का पालन करना आवश्यक नहीं होता। इन 2 दिनों में शुरू होने वाले पंचक के दौरान उपरोक्त बताए गए कार्यों के अलावा किसी भी तरह के शुभ कार्य किए जा सकते हैं।

पंचक के दौरान न किए जाने वाले कार्य

हिंदू धर्म में शास्त्रों के अनुसार पंचक के समय के दौरान कुछ ऐसे कार्य बताए गए हैं जिन्हें नहीं करना चाहिए क्योंकि इनका समय अनुकूल नहीं होता।

●  इनमें विशेष रूप से दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करना वर्जित माना जाता है।
●  साथ ही यदि आपका घर का निर्माण हो रहा है तो पंचक के समय में घर की छत नहीं बनानी चाहिए। अर्थात लेंटर नहीं डालना चाहिए।
●  इसके अलावा पंचक के दौरान लकड़ी, कण्डा या अन्य प्रकार के ईंधन का भंडारण नहीं करना चाहिए।
●  इनके अतिरिक्त भी कुछ ऐसे कार्य है जो पंचक के समय में नहीं करनी चाहिए उनमें विशेष रूप से किसी भी प्रकार का पलंग खरीदना अथवा पलंग बनवाना, बिस्तर खरीदना या बिस्तर का दान करना भी कष्टदायक माना जाता है।

इसी लिए इस दौरान यह सभी कार्य नहीं किए जाते। हालांकि इन सभी कार्यों के अतिरिक्त अन्य कोई भी कार्य आप पंचक के दौरान कर सकते हैं।

पंचक के दौरान किए जाने वाले कार्य

जैसा कि हमने पहले भी बताया की पंचक सभी कार्यों के लिए अशुभ नहीं होते बल्कि कई कार्यों को करने के लिए पंचक अत्यंत शुभकारी माने जाते हैं। आइए जानते हैं कि कौन से हैं वे कार्य जो पंचक के दौरान किए जा सकते हैं:

पंचक के दौरान जो नक्षत्र होते हैं उनमें कुछ विशेष योगों का निर्माण भी होता है। जैसे कि धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद तथा रेवती नक्षत्र यात्रा करने, मुंडन कार्य, तथा व्यापार आदि शुभ कार्यो के लिए प्रशस्त माने गए हैं।

इसके अलावा उत्तराभाद्रपद नक्षत्र वार के साथ मिलकर सर्वार्थ सिद्धि योग बनाता है। हालांकि हम पंचक को अशुभ की संज्ञा देते हैं लेकिन पंचक के दौरान अन्य शुभ कार्य जैसे कि सगाई समारोह, विवाह आदि शुभ कार्य भी किए जाते हैं।

पंचक के तीन नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद तथा रेवती यदि रविवार के दिन पड़े तो विभिन्न प्रकार के शुभ योग बनाते हैं जिनमें चर, स्थिर और प्रवर्ध मुख्य हैं। इन योग के कारण व्यक्ति को सफलता की प्राप्ति होती है व उसे धन लाभ भी होता है।

मुहूर्त चिंतामणि ग्रंथ मुहूर्त के बारे में विशेष रूप से प्रकाश डालता है। इसके अनुसार यदि पंचक के नक्षत्रों में से धनिष्ठा और शतभिषा नक्षत्र चल संज्ञक माने जाते हैं। इसलिए नक्षत्रों के दौरान कोई भी चलने वाला काम अर्थात गति वाला काम करना अत्यंत अशुभ होता है। जैसे कि किसी प्रकार की यात्रा करना, वाहन खरीदना, कल पुर्जे और मशीनरी आदि से संबंधित काम करना आदि। वहीं दूसरी ओर उत्तरभाद्र पद नक्षत्र स्थिर संज्ञक नक्षत्र होता है। इसलिए इस नक्षत्र के दौरान ऐसे कार्य किए जाते हैं जिनमें स्थिरता की आवश्यकता होती है। इनमें मुख्य रूप से गृह प्रवेश करना, शांति पूजन कराना, बीज बोना तथा जमीन से जुड़े स्थिर प्रकृति के कार्य किए जा सकते हैं।

अंतिम नक्षत्र रेवती मैत्री संज्ञक नक्षत्र होता है। इसलिए इस नक्षत्र के दौरान किसी भी प्रकार के वाद विवाद का निपटारा करना, व्यापार अथवा कपड़े से संबंधित सौदा करना, नए आभूषण खरीदना आदि संबंधित शुभ कार्य किए जा सकते हैं।

पंचक के दौरान इन बातों का रखें विशेष ध्यान

शास्त्रों में कुछ ऐसी बातें बताई गई हैं जिन्हें पंचक के दौरान विशेष रुप से ध्यान में रखा जाता है।

1.  इनमें प्रत्येक पंचक के लिए विशेष रूप से अलग अलग बातें बताई गई हैं, जैसे कि जिस समय धनिष्ठा नक्षत्र का पंचक हो, उस समय किसी प्रकार की लकड़ी, ईंधन, घास आदि एकत्रित नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से आग लगने का भय होता है।
2.  यदि पंचक के दौरान किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो पंचक के समय में उसके शव का अंतिम संस्कार करने से पूर्व किसी विशेष और योग्य पंडित से पूरी जानकारी लेनी चाहिए और पंचक के समय में शव का अंतिम संस्कार करने से बचना चाहिए। यदि आवश्यक हो तो गरुड़ पुराण के अनुसार उसके साथ आटे और कुश के 5 पुतलों का भी दाह संस्कार पूरे विधि विधान के अनुसार किया जाना चाहिए अन्यथा मृतक के कुटुंब और निकट के लोगों पर मृत्यु का संकट मंडराता रहता है।
3.  पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिए क्योंकि दक्षिण दिशा को मृत्यु के देवता यम की दिशा माना जाता है। ऐसे में पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा हानिकारक और कष्टदायक हो सकती है।
4.  पंचक के दौरान रेवती नक्षत्र चल रहा हो तो घर की छत नहीं बनानी चाहिए अर्थात लेंटर नहीं डालना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से धन की हानि होती है और परिवार में कलेश की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
5.  पंचक के दौरान किसी भी प्रकार का पलंग बनवाना भी बड़े से बड़े संकट को निमंत्रण दे सकता है। विशेष रुप से धनिष्ठा नक्षत्र के पंचक में अग्नि का भय होता है और शतभिषा नक्षत्र में कलह होने की संभावना होती है।
6.  पूर्वाभाद्रपद के पंचक में रोग होने की संभावना काफी होती है तथा उत्तरा भाद्रपद के पंचक में धन हानि और कष्ट मिलने की संभावना होती है।
7.  इसके अलावा रेवती नक्षत्र के पंचक में मानसिक कष्ट होने की प्रबल संभावना होती है। इसलिए पंचक के दौरान जो कार्य निषेध माने जाते हैं उनका त्याग कर अन्य शेष शुभ कार्यों का संपादन किया जा सकता है।

हम आशा करते हैं कि पंचक के बारे में दी गई जानकारी को पढ़कर आपके ज्ञान में वृद्धि हुई होगी और अब आप पंचक के बारे में सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त करने के बाद अपने जीवन में सफलता पा सकेंगे।

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