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अभिजित मुहूर्त

बुधवार, अक्टूबर 18, 2017 को

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New Delhi, India के लिए

अभिजित मुहूर्त

अभिजित का अर्थ है “विजेता” और मुहूर्त अर्थात “समय”। हमारे सनातन धर्म में समय को अत्यंत ही महत्व दिया गया है और ऐसा माना जाता है कि यदि कार्य को सही समय पर किया जाये तो सफलता निश्चित है।सामान्यतः मुहूर्त के लिए दिन, तिथि, नक्षत्र, योग और दिनमान का योग देखा जाता है, और उसके आधार पर निर्णय लिया जाता है कि कौन-सा कार्य कब करें कि सफलता सुनिश्चित हो। परन्तु ये गणनाएँ कुछ जटिल होती हैं और इन्हें कोई पंचांग का विशेषज्ञ ही बता सकता है। ऐसी स्थिति में जनसामान्य के लिए जिन्हें पंचांग की जानकारी न भी हो तो अभिजित मुहूर्त सर्वोत्तम है। अभिजित मुहूर्त प्रत्येक दिन में आने वाला एक ऐसा समय है जिसमे आप लगभग सभी शुभ कर्म कर सकते हैं। यहाँ एक बात स्पष्ट करने योग्य है कि अभिजित मुहूर्त और अभिजित नक्षत्र का कोई सीधा सम्बन्ध नहीं होता। परन्तु यदि अभिजित मुहूर्त और अभिजित नक्षत्र एक साथ पड़ जाएँ तो अत्यंत ही शुभ माना जाता है।

अभिजित मुहूर्त का समय

हिन्दू मान्यता के अनुसार हमारा पूरा दिन अर्थात सूर्योदय से लेकर अगले सूर्योदय तक का समय कुल 30 मुहूर्तों में विभक्त है, जिनमें से 15 सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक तथा 15 सूर्यास्त से लेकर सूर्योदय तक के हैं। इन 30 मुहूर्तों में से कुछ शुभ कर्मों के लिए ग्राह्य है, तो कुछ शुभ कर्मों के लिए वर्जित। अभिजित मुहूर्त इन सभी मुहूर्तों में अत्यंत ही शुभ तथा फलदायी माना जाता है। अभिजित मुहूर्त प्रत्येक दिन मध्यान्ह से करीब 24 मिनट पहले प्रारम्भ होकर मध्यान्ह के 24 मिनट बाद समाप्त हो जाता है। अर्थात यदि सूर्योदय ठीक 6 बजे हो तो दोपहर 12 बजे से ठीक 24 मिनट पहले प्रारम्भ होकर यह दोपहर 12:24 पर समाप्त होगी। यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि अभिजित मुहूर्त का वास्तविक समय सूर्योदय के अनुसार परिवर्तित होता रहता है।

अभिजित मुहूर्त में किये जाने वाले कर्म

अभिजित मुहूर्त लगभग सभी शुभ कर्मों में ग्राह्य हैं जैसे - पहली बार किसी कार्य से यात्रा प्रारम्भ करना, किसी नए कार्य को प्रारम्भ करना, दूकान या व्यापार का प्रारम्भ करना, ऋण को चुकाना या धन संग्रह करना या पूजा का प्रारम्भ करना इत्यादि। कुछ विद्वान इस समय गृह प्रवेश, मुंडन कार्य, विवाह इत्यादि की भी मान्यता देते हैं। परन्तु, ऐसी भी मान्यता है कि सामान्य शुभ कार्य के लिए तो यह अत्यंत उत्तम है, परन्तु मांगलिक कार्य तथा ग्रह प्रवेश जैसे प्रमुख कार्यों के लिए और भी योगों को देखना आवश्यक है।

अभिजित मुहूर्त में क्या नहीं करें

अभिजित मुहूर्त में दक्षिण दिशा की यात्रा को निषेध किया गया है। साथ ही बुधवार को अभिजित मुहूर्त में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।

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