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अस्त ग्रह: उच्च, नीच तथा अस्त ग्रहों का ज्योतिष में महत्व

ग्रहों का उच्च होना अथवा नीच होना या फिर वक्री और अस्त होना किसी भी जातक की कुंडली का अध्ययन करते समय बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इन्हीं के आधार पर ग्रहों की अवस्था तथा ग्रहों का बल ज्ञात किया जाता है। इसलिए इन पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए। इसी के अनुसार ग्रहों द्वारा प्राप्त होने वाले फलों का अनुमान भी लगाया जा सकता है। यदि कोई ग्रह अस्त है तो ऐसे ग्रह का स्वभाव और इनसे मिलने वाले फल आसानी से दिखाई नहीं देते।

वैदिक ज्योतिष के अंतर्गत सूर्य को ग्रहों का राजा माना जाता है। ग्रहों के उच्च, नीच, वक्री और अस्त होने से उनके द्वारा प्रदान किए जाने वाले फलों में विशेष अंतर पाया जाता है। उच्च ग्रह सर्वाधिक बलशाली होता है और नीच ग्रह अत्यधिक कमजोर। जब कोई ग्रह अस्त अवस्था में कुंडली में होता है तो उसका प्रभाव लगभग नगण्य हो जाता है और सूर्य के अधिकार क्षेत्र में आ जाने के कारण सूर्य के अनुसार ही फल देना प्रारंभ कर देता है। ऐसे ग्रह को ज्योतिष में विकल अवस्था में माना जाता है। वहीं वक्री ग्रह को चेष्टा बल प्राप्त होता है अर्थात ये और अधिक बली होते हैं। आइये अब यह जानते हैं कि वास्तव में ग्रहों का अस्त होना तथा उनकी उच्च एवं नीच अवस्था क्या है?

अस्त ग्रह

सरल शब्दों में कहा जाए तो जब कोई ग्रह सूर्य के निकट स्थित होता है या कुछ विशेष अंशों में स्थित होता है तो सूर्य की ऊष्मा और प्रकाश के आगे उसकी स्वयं की चमक फीकी पड़ जाती है और वह आकाश में दृष्टिगोचर नहीं होता। इस स्थिति को ग्रह का अस्त होना कहते हैं। ज्योतिषीय ग्रंथों के अनुसार जब मंगल ग्रह सूर्य से 17 अंशों के अंतर पर होता है अथवा उससे समीप होता है तो अस्त हो जाता है। इसी प्रकार बुध 14 अंशों पर, बृहस्पति 11 अंशों पर अस्त माना जाता है। चंद्रमा सूर्य से 12 अंशों पर तथा शुक्र 10 अंश और शनि 15 अंश में आने पर अस्त अवस्था में माने जाते हैं। राहु और केतु छाया ग्रह हैं, अतः ये कभी अस्त नहीं होते।

जब ग्रह अस्त होता है तो उसके मुख्य कारकत्वों में कमी आ जाती है और वह सूर्य की स्थिति के अनुसार फल देने लगता है। प्रत्येक ग्रह किसी विशेष कारकत्व के कारण हर किसी के लिए अति आवश्यक है, इसलिए अस्त ग्रह को मजबूत बनाना चाहिए जिससे कि वो अपने नैसर्गिक फल प्रदान कर सके।

उच्च ग्रह अवस्था

ज्योतिष शास्त्र वास्तव में ग्रहों द्वारा मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को बताता है। यदि कोई ग्रह बलशाली है तो वे सर्वाधिक क्षमता से हमें प्रभावित करता है और यदि कोई ग्रह कमजोर है तो उसकी प्रभावित करने वाली क्षमता कमजोर होती है अर्थात उसका प्रभाव हम पर अन्य ग्रहों के मुकाबले कम पड़ता है। विशेष रूप से उच्च का ग्रह देखने के लिए हमें यह जानना आवश्यक है कि जिस प्रकार सभी ग्रह अपनी कक्षा में परिभ्रमण करते हैं तो परिक्रमा पथ पर एक ऐसा बिंदु होता है जहां से वह ग्रह पृथ्वी के सापेक्ष अत्यधिक प्रभावशाली हो जाता है। उस बिंदु को उस ग्रह विशेष की पूर्ण परमोच्च अवस्था कहा जाता है। यह अवस्था प्रत्येक ग्रह के लिए अलग-अलग होती है इस प्रकार सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि सभी सात ग्रह अपना एक अंशात्मक मान रखते हैं, जिन पर ये अपनी परमोच्च अवस्था में होते हैं। हालांकि जिस राशि में ये परमोच्च के होते हैं, उस बिंदु पर न होने पर भी उच्च के माने जाते हैं। इस प्रकार प्रत्येक ग्रह किसी विशेष राशि में और किसी विशेष नक्षत्र में एक विशेष अंश पर स्थित होकर उच्च का माना जाता है।

कौन सा ग्रह कितने अंशों पर उच्च अवस्था में होता है इसे निम्नलिखित विवरण के द्वारा जान सकते हैं:

●  सूर्य मेष राशि में 10 अंश अश्वनी नक्षत्र में स्थित होने पर पूर्ण उच्च अवस्था में माना जाता है। यदि इससे कम अथवा अधिक अंशों पर मेष राशि में सूर्य स्थित है तो भी उसे उच्च माना जाएगा।
●  चंद्रमा वृषभ राशि में 3 अंश पर कृतिका नक्षत्र में पूर्ण उच्च अवस्था में स्थित माना जाता है। हालांकि यदि वह 3 से कम या अधिक अंशों पर स्थित हो तो इस पूरी राशि में भी उच्च का माना जाएगा।
●  इसी प्रकार मंगल ग्रह मकर राशि में 28 अंश पर धनिष्ठा नक्षत्र में स्थित होने पर पूर्ण उच्च अवस्था में माना जाता है।
●  यदि बुध ग्रह की बात की जाए तो यह कन्या राशि में 15 अंश पर हस्त नक्षत्र में पूर्ण उच्च होते हैं।
●  देव गुरु बृहस्पति कर्क राशि में 5 अंश पर पुष्य नक्षत्र में स्थित होने पर परमोच्च अवस्था में माने जाते हैं।
●  दैत्य गुरु शुक्र मीन राशि में 27 अंश पर रेवती नक्षत्र में स्थित होने पर अपनी पूर्ण उच्च अवस्था में स्थित माने जाते हैं।
●  कर्म प्रधान ग्रह शनि संतुलन की कारक तुला राशि में 20 अंश पर स्वाति नक्षत्र में स्थित होने पर अपने पूर्ण उच्च बिंदु पर होते हैं।
●  राहु और केतु को मुख्य रूप से उच्च और नीच राशि में नहीं गिना जाता, फिर भी मतान्तर से कुछ लोग राहु को वृषभ राशि में और कुछ लोग मिथुन राशि में उच्च का मानते हैं।
●  इसी प्रकार केतु को धनु राशि अथवा वृश्चिक राशि में उच्च का माना जाता है।

नीच ग्रह अवस्था

जिस प्रकार कोई ग्रह उच्च अवस्था में सबसे अधिक प्रभावशाली साबित होता है ठीक उसके विपरीत अपनी नीच अवस्था में वह कमजोर हो जाता है और अच्छे के स्थान पर बुरे फल देने में सक्षम होता है। यदि सरल शब्दों में बात करें तो कोई ग्रह जिस राशि में उच्च का होता है उससे ठीक सप्तम राशि में वह नीच का होता है। वास्तव में अपने परमोच्च बिंदु से ठीक 180 अंश पर कोई ग्रह होने पर परम नीच अवस्था में माना जाता है। अर्थात वह ग्रह अपनी कक्षा में परिभ्रमण करते समय ऐसे बिंदु पर पहुंच जाता है जहां पृथ्वी के सापेक्ष सबसे कम प्रभावशाली होता है। उस बिंदु को उस ग्रह विशेष की पूर्ण नीच अवस्था कहा जाता है। यह अवस्था भी हर ग्रह के लिए अलग-अलग होती है।

कौन सा ग्रह कितने अंशों पर परम नीच अवस्था में होता है इसे निम्नलिखित विवरण के द्वारा जान सकते हैं:

●  सूर्य तुला राशि में 10 अंश पर स्थित होने पर पूर्ण नीच अवस्था में माना जाता है। यदि इससे कम अथवा अधिक अंशों पर इसी राशि में सूर्य स्थित है तो उसे केवल नीच अवस्था में स्थित माना जाएगा।
●  चंद्रमा वृश्चिक राशि में 3 अंश पर पूर्ण नीच अवस्था में स्थित माना जाता है।
●  इसी प्रकार मंगल ग्रह कर्क राशि में 28 अंश पर स्थित होने पर पूर्ण नीच अवस्था में माना जाता है।
●  यदि बुध ग्रह की बात की जाए तो यह मीन राशि में 15 अंश पर पूर्ण नीच अवस्था में होते हैं।
●  देव गुरु बृहस्पति मकर राशि में 5 अंश पर स्थित होने पर परम नीच अवस्था में माने जाते हैं।
●  शुक्र कन्या राशि में 27 अंश पर स्थित होने पर अपनी पूर्ण नीच अवस्था में स्थित माने जाते हैं।
●  शनि मेष राशि में 20 अंश पर स्थित होने पर अपने पूर्ण नीच बिंदु पर होते हैं।
●  राहु को वृश्चिक अथवा धनु राशि में नीच अवस्था में मानते हैं।
●  इसी प्रकार केतु को वृषभ राशि में अथवा मिथुन राशि में नीच का माना जाता है।

इस प्रकार ग्रहों का उच्च, नीच अथवा अस्त अवस्था में स्थित होना किसी व्यक्ति, देश अथवा संसार पर गहरा प्रभाव डालता है। हम आशा करते हैं कि हमारे द्वारा दिया गया यह लेख आपको ग्रहों की उपरोक्त अवस्थाओं को जानने में मददगार साबित होगा और इसकी सहायता से आप अपने जीवन में सही मार्ग को चुनकर आगे बढ़ेंगे।

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