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  1. भाषा :

उगादी 2020 दिनांक व मुहूर्त

2020 मध्ये उगडी कधी आहे?

25

मार्च, 2020

(बुधवार)

उगडी पंचांगम मुहूर्त्त New Delhi, India

2077 तेलगू संवत्सर सुरवात
प्रथम तिथी सुरवात 14:59:33 पासुन. मार्च 24, 2020 रोजी
प्रथम तिथी समाप्ती 17:28:39 पर्यंत. मार्च 25, 2020 रोजी

चला जाणून घेऊया 2020 मध्ये उगादी केव्हा आहे व उगादी 2020 चे दिनांक व मुहूर्त.

दक्षिण भारत में उगादी हिन्दू नववर्ष के आगमन की ख़ुशी में मनाया जाता है। 2020 के तेलुगू संवत्सर का नाम प्रमादी 2077 है।

उगादी मुहूर्त

1.  हिन्दू पंचांग के अनुसार युगादी चैत्र मास के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा को मनाया जाता है।
2.  प्रतिपदा तिथि सूर्योदय के समय होनी चाहिए।
3.  यदि प्रतिपदा 2 दिनों के सूर्योदयों पर पड़ रही हो तो पहले दिन उगादि का त्यौहार मनाना चाहिए।
4.  यदि प्रतिपदा एक भी सूर्योदय पर नहीं पड़ रही हो तो जिस दिन वह तिथि शुरू हुई है, उस दिन त्यौहार मनाया जाएगा।
5.  युगादि का त्यौहार अधिक मास में नहीं मनाया जाता है। यह केवल शुद्ध चैत्र मास में मनाया जाता है।

नूतन संवत्सर के स्वामी (वर्षेष)

नव संवत्सर के पहले दिन के स्वामी को ही पूरे साल के स्वामी का दर्जा दिया गया है। हिन्दू नव वर्ष 2077 का पहला दिन बुधवार है और इस दिन के स्वामी बुध हैं। अतः इस साल के स्वामी बुध होंगे।

उगादी का त्यौहार

उगादी की शुरूआत एक सप्ताह पहले से ही हो जाती है। लोग अपने-अपने घरों की साजो-सज्जा करते हैं और नए कपड़ों के साथ त्यौहार से संबंधित सभी ज़रूरी वस्तुओं की ख़रीदारी करते हैं। उगादी के दिन लोग सुबह-सुबह जगकर सूर्योदय से पहले स्नान करते हैं और आम के पत्तों से बने तोरण से घर के दरवाज़ों को सजाते हैं। आइए अब यह जानते हैं कि लोग आख़िर आम के पत्तों से ही सजावट क्यों करते हैं:

देवी पार्वती और भगवान शंकर के पुत्र कार्तिकेय और गणेश को आम बेहद ही पसंद थे। कार्तिकेय भगवान ने लोगों से कहा कि वे अपने घर के द्वार पर आम के पत्ते लगाएँ, जिससे उनके परिवार में सुख-समृद्धि का आगमन होगा और अच्छी फ़सल होगी। तभी से यह परंपरा आरंभ हुई।

इस दिन लोग अपने घर के सामने या बरामदे में गाय के गोबर से मिला जल छिड़ककर रंग-बिरंगी रंगोली बनाते हैं। लोग अपने-अपने इष्टदेवों की पूजा अपनी श्रद्धानुसार करते हैं और मंगलकामना करते हैं।

दक्षिण भारत में रहने वाले लोग उगादी का त्यौहार बड़े ही धूम-धाम से मनाते हैं। लोग अपने सगे-संबंधियों के साथ एक जगह इकट्ठा होते हैं और तरह-तरह के व्यंजनों का आनंद लेते हैं।

उगादी पर बनने वाले मुख्य व्यंजन

कुछ लोग आज के दिन 6 स्वादों से युक्त व्यंजन खाते हैं। लोगों की मान्यता है कि जीवन अलग-अलग भावनाओं और संवेदनाओं का मिश्रण है, और हर एक भावना 1 स्वाद की तरह होती है। इस दिन का सबसे ख़ास और लोकप्रिय व्यंजन उगादी पच्छाड़ी है, जिसमें 6 प्रकार का स्वाद होता है। हालाँकि अलग-अलग क्षेत्रों के हिसाब से इसे बनाने की सामग्री बदल जाती है। आइए जानते हैं कुछ क्षेत्रों में प्रमुख रूप से इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों के बारे में:

सामग्रीस्वादसंवेदना
नीम के फूल और कलियाँकड़वाउदासी
गुड़मीठाख़ुशी
मिर्चतीखाक्रोध
नमकनमकीनडर
इमली का रसखट्टाघृणा
कच्चा आमतेज़ स्वादआश्चर्य

कर्नाटक के लोग इसे बेवू बेल्ला के रूप में खाते हैं। उगादी पचादी इस दिन प्रसाद के रूप में खाई जाती है। युगादी के दिन सबसे पहले लोग उगादी पचादी को ही खाते हैं। कई जगहों पर लोग गुड़ के साथ नीम के पत्ते भी खाते हैं।

इस दिन कई और व्यंजन भी बनाए जाते हैं जिनमें से एक व्यंजन का नाम ओबट्टू/होलिगे/पूरन पोली है।

बाद में दिन में लोग किसी एक स्थान पर (ज़्यादातर मंदिर में) इकट्ठा होते हैं और बड़े-बुज़ुर्गों से नए साल का पंचाग और राशिफल सुनते हैं। कई इलाक़ों में कवि-सम्मेलनों का आयोजन भी होता है। कुछ लोग इस दौरान अष्टावधानम्, षठावधानम्, और सहस्रावधानम् का प्रदर्शन करते हैं। यह अपने आप में एक नायाब कला है। इसमें साहित्य के 8, 100 या 1000 विशेषज्ञ छंदों का संकेत देते हैं और उस 1 व्यक्ति को उन सभी छंदों का स्मरण सही क्रम में करके एक कविता के रूप में गाकर सुनाना होता है। यह सम्मलेन के ख़त्म होते वक़्त किया जाता है।

विभिन्न क्षेत्रों में उगादी का त्यौहार

कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र और कोंकणी समुदाय के लोग इसे युगादी के नाम से पुकारते हैं, वहीं तमिलनाडु के लोग इसे उगादी और युगादी दोनों नामों से संबोधित करते हैं। महाराष्ट्र के अधिकतर लोग इस त्यौहार को गुड़ी पड़वा के नाम से मनाते हैं।

अलग-अलग क्षेत्रों में उगादी को निम्नलिखित नामों से जाना जाता है:

• गोवा और केरल में संवत्सर पड़वा या संवत्सर पड़वो
• कर्नाटक के कोंकणी लोग युगादी कहते हैं
• तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में उगादी
• महाराष्ट्र में गुड़ी-पड़वा
• राजस्थान में थापना
• कश्मीर में नवरेह
• मणिपुर में साजिबु नोंगमा पांबा या मेइतेई चेइराओबा
• उत्तर भारत में चैत्र नवरात्रि आज से शुरू होती है

आप सभी को ऐस्ट्रोसेज की ओर से उगादी की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

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